सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप के दोषियों की फांसी की सजा रखी बरकरार, फैसले से देशभर में खुशी!



16 दिसम्बर 2012 की रात को दिल्ली की सड़कों पर एक भयावह दुर्घटना घटी थी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ दक्षिणी दिल्ली की एक चलती बस में कुछ वहसी दरिंदों ने बर्बर तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया। दुष्कर्म करने के बाद उसे और उसके एक दोस्त को बस से नीचे फेंक दिया गया। जब सुबह इस घटना के बारे में लोगों को पता चला तो पूरा देश शोक की लहर में डूब गया। 29 दिसम्बर 2012 को निर्भया ने अपने जीवन की आखिरी सांस ली थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने निर्भया को न्याय दिया है।
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निर्भया गैंगरेप कांड देश के इतिहास का सबसे घिनौना अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके चार दोषियों को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर. भानुमती की पीठ ने चारो आरोपियों अक्षय, मुकेश, विनय और पवन की दिल्ली उच्च न्यायलय के खिलाफ अपील ठुकराते हुए उनकी मौत की सजा बरकरार रखी है।

न्यायमूर्ति आर. भानुमती ने सुनाया अलग से फैसला:

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की हर जगह सराहना हो रही है और देशभर में कोर्ट के इस फैसले से खुशी है। कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड के मामले पर कहा कि यह देश की सबसे निर्मम घटना थी और इस घटना को विरले में विरलतम की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के तीनों न्यायधीशों का फैसला सहमती से था, लेकिन न्यायमूर्ति आर. भानुमती ने इसके लिए अलग से भी फैसला सुनाया।

कार्यवाही के दौरान मौजूद थे निर्भया के माता-पिता:

जब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही चल रही थी तो कोर्ट के अन्दर मीडियाकर्मी के साथ निर्भया के माता-पिता भी थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड ने पूरे देश को दर्द के सागर में डुबो दिया था। उस घिनौने कांड के लिए देश के लोगों में कोर्ट के फैसले से एक अलग सन्देश जायेगा। शीर्ष अदालत ने चारों मुख्य दोषियों अक्षय, विनय, मुकेश और पवन की अपील पर 27 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

कर ली थी तिहाड़ जेल में आत्महत्या:

चारो मुख्य दोषियों ने 13 मार्च 2014 को उच्च न्यायलय द्वारा सुनाई गई मौत की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इन चारो दोषियों के साथ एक अन्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में ही आत्महत्या कर ली थी, साथ ही एक अन्य नाबालिग आरोपी को बाल सुधारगृह भेज दिया गया था। उसे सुधारगृह गए 3 साल हो चुके हैं।

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