लाश पर हाथ फेर पिता ने कहा- बेटी मुझे माफ कर, तेरी अर्थी नहीं उठा पाऊंगा
जमशेदपुर (झारखंड)।जमशेदपुर के टेल्को कॉलोनी की रहने वाली स्टूडेंट हरप्रीत कौर की शनिवार को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। सोमवार को उसका अंतिम संस्कार किया गया। इस हादसे में उसके पिता भी जख्मी हुए थे। अंतिम यात्रा के दौरान जख्मी पिता की जुबां से सिर्फ यही निकला- 'बेटी मुझे माफ करना। आज मैं मजबूर हूं। अर्थी को कंधा भी नहीं दे सकता।' कैसे हुआ था हादसा...
-हरप्रीत की कजन बहन की रिंग सेरेमनी 16 अप्रैल काे थी। वो पिता जसपाल सिंह के साथ शनिवार को स्कूटी से बहन के कपड़े ठीक कराने साकची गई थी।
- लौटते समय अज्ञात वाहन ने पिता व बेटी को टक्कर मार दिया। हरप्रीत की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, पिता जसपाल सिंह को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी स्थिति खतरे से बाहर है।
-सोमवार को अंतिम दर्शन के लिए घर के बाहर हरप्रीत का शव रखा गया। रिश्तेदारों के सहारे जसपाल सिंह भी बाहर आए।
-वे शव से लिपट कर कहने लगे- 'जाग हरप्रीत! अब मुझसे कौन झगड़ा करेगा? उठो, मैंने तुम्हारे लिए क्या-क्या सपने संजोए थे। तुम्हारी ख्वाहिशों को भी पूरा करना है। जागो तुम्हें बेंगलुरु जाना है ना'।
-उनकी बातें सुन पूरा माहौल गमगीन हो गया। मां बलजीत कौर भी हरप्रीत के शव से लिपटी हुई थीं। वह बार-बार बेटी को उठने के लिए आवाज लगाती रहीं।
-वे शव से लिपट कर कहने लगे- 'जाग हरप्रीत! अब मुझसे कौन झगड़ा करेगा? उठो, मैंने तुम्हारे लिए क्या-क्या सपने संजोए थे। तुम्हारी ख्वाहिशों को भी पूरा करना है। जागो तुम्हें बेंगलुरु जाना है ना'।
-उनकी बातें सुन पूरा माहौल गमगीन हो गया। मां बलजीत कौर भी हरप्रीत के शव से लिपटी हुई थीं। वह बार-बार बेटी को उठने के लिए आवाज लगाती रहीं।
अंतिम दर्शन के बाद पिता फिर अस्पातल में भर्ती
- अरदास के बाद शव टेल्को गुरुद्वारा ले जाया गया। फिर सुवर्णरेखा बर्निंग घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
-अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। पर पिता जसपाल सिंह शव यात्रा में शामिल नहीं हो सके। भाई-भतीजों ने कहा- हम संभाल लेंगे। आपको आराम की जरूरत है।
-जसपाल सिंह की जुबां से सिर्फ यही निकला- 'हरप्रीत बेटा मुझे माफ करना। आज मैं मजबूर हूं। तुम्हारी अर्थी को कंधा भी नहीं दे सकता'।
-अस्पताल में इलाजरत पिता जसपाल सिंह को बेटी के अंतिम दर्शन के लिए पांच घंटे की छुट्टी लेकर घर ले जाया गया था।
-शव यात्रा निकलने के बाद शाम चार बजे पुन: जसपाल सिंह को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। दुर्घटना में उनके दाहिने हाथ में चार स्थान पर फैक्चर आया है। उनका ऑपरेशन होना है।
- अरदास के बाद शव टेल्को गुरुद्वारा ले जाया गया। फिर सुवर्णरेखा बर्निंग घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
-अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। पर पिता जसपाल सिंह शव यात्रा में शामिल नहीं हो सके। भाई-भतीजों ने कहा- हम संभाल लेंगे। आपको आराम की जरूरत है।
-जसपाल सिंह की जुबां से सिर्फ यही निकला- 'हरप्रीत बेटा मुझे माफ करना। आज मैं मजबूर हूं। तुम्हारी अर्थी को कंधा भी नहीं दे सकता'।
-अस्पताल में इलाजरत पिता जसपाल सिंह को बेटी के अंतिम दर्शन के लिए पांच घंटे की छुट्टी लेकर घर ले जाया गया था।
-शव यात्रा निकलने के बाद शाम चार बजे पुन: जसपाल सिंह को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। दुर्घटना में उनके दाहिने हाथ में चार स्थान पर फैक्चर आया है। उनका ऑपरेशन होना है।

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