६० सालो में पहली बार, इस खौफ से कशमीर मैं जुमे को नहीं फहराया गया पाकिस्तानी झंडा!!

६० सालो में पहली बार, इस खौफ से कशमीर मैं जुमे को नहीं फहराया गया पाकिस्तानी झंडा!!
क्या आप जानते हैं???
बुरहान बानी सहित जिन 10 आतँकवादियो ने भारतीय सेना को चैलेंज किया था उनमे से 9 कबर में दफन हो चुके हैं।
पैलेट गन का इस कदर खौफ़ है कश्मीरियों में कि 3 शुक्रवार हो गए पाकिस्तान का झंडा नहीं लहराया गया
कश्मीर में भले ही बुरहान के समर्थक भारतीय सैनिकों पर पत्थरबाजी करके उनके फौसले को पस्त करने की कोशिश कर रहे हों लेकिन सोशल मीडिया और ट्विटर पर लोग सेना के जमकर हौसलाफजाई कर रहे हैं।
लोग ट्विटर पर सेना का हौसला बढाने के लिए ‘ठोंक दिया बुरहान को’ टॉप पर ट्रेंड करा रहें है। लोग सेना के समर्थन में ट्वीट करके उनका हौसला बढ़ा रहे हैं साथ ही उनसे यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसे ही सफाई अभियान जारी रहना चाहिए।
बुरहान वानी खतरनाक आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का आतंकी था और कश्मीर में सेना और भारत सरकार के खिलाफ पिछले कई महीने से आतंकियों की भर्ती कर रहा था। वह सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो और फोटो अपलोड करके कश्मीर के मुस्लिमों को आक्रोशित करता था।
भारत सरकार ने आतंकी बुरहान वानी को ज़िंदा या मुर्दा पकड़ने एक लिए १० लाख ला इनाम रखा था। उसी के एक सहयोगी की सूचना पर ८ जुलाई को सेना से उसे और उसके दो साथियों का एनकाउंटर कर दिया था।
तीन सप्ताह से कश्मीर में जारी हिंसा के बीच राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि यदि सुरक्षाबलों को पहले पता होता कि उस ठिकाने में हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर बुरहान वानी है तो उसे एक मौका जरूर दिया जाता। महबूबा के इस बयान पर बीजेपी ने हैरानी जताई है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री झूठ बोल रही हैं।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर मुख्यमंत्री महबूबा ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने उन्हें बताया था कि दक्षिणी कश्मीर के काकरनाग इलाके में एक घर में ‘तीन आतंकवादी छिपे हुए हैं’ लेकिन ‘उन्हें नहीं पता था कि आतंकवादी कौन हैं’।
शायद वह यह कहना चाह रही थीं कि कश्मीर में विद्रोह का चेहरा बन चुके और कश्मीरी युवाओं में लोकप्रिय वानी की मौजूदगी का अगर पहले से पता होता तो शायद उसकी मौत के बाद जो कुछ हुआ उससे बचने के लिए पर्याप्त उपाय अपनाए गए होते। महबूबा ने कहा कि कश्मीर घाटी में हालात बेहद तेजी से बदले और राज्य सरकार को व्यापक हिंसा की रोकथाम की तैयारी के लिए पर्याप्त समय भी नहीं मिला।

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